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बटाईकेला गोठान की अंबिका स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए बटेर पालन बना आमदनी का जरिया


बटाईकेला गोठान की अंबिका स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए बटेर पालन बना आमदनी का जरिया
बटाईकेला गोठान की अंबिका स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए बटेर पालन बना आमदनी का जरिया
13-09-21 06:24:09         sourabh tripathi


समूह को प्रशासन द्वारा 82 बटेर पालन के लिए चूजें उपलब्ध कराया गया था

लगभग 2 माह में 40 चूजें गोठानों में समूह को दिया जा रहा हैै-

जशपुरनगर 13 सितम्बर 2021/ राज्य शासन के दिशा निर्देश में जिला प्रशासन के सार्थक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सार्थक प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में कारगर कदम उठाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना के साथ गोधन न्याय योजना का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। गोठानों में स्व-सहायता समूह की महिलाएं अनेक गतिविधियों में शामिल हो रही है। समूह की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट खाद बनाने के साथ अन्य आजीविका, मुर्गी पालन, बकरी पालन, कड़कनाथ बांस के टोकरी बनाना, ड्रायविंग प्रशिक्षण, प्लसेमेंट एजेंसी, तार फेन्सिंग कार्य आदि अन्य कार्य से भी जुड़ी हुई है। कांसाबेल विकासखंड की बटाईकेला गोठान की स्व-सहायता समूह की महिलाओ ंको आत्मनिर्भर बनाने के  लिए कृषि विज्ञान केन्द्र डुमरबहार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकास मिशन योजना बिहान के तहत् अंबिका स्व-सहायता समूह को बटेर पालन के लिए 82 चूजे किरण स्व-सहायता समूह को 50 कड़कनाथ के चूजे, और चांद स्व सहायता समूह को मिनी राईस मील उपलब्ध कराया गया है।
अंबिका स्व-सहायता समूह की महिलाएं लगभग 2 माह से सफलता पूर्वक बटेर पालन कर रही है।  साथ ही समूह द्वारा 4500 रुपए के हैचरी मशीन खरीद करके बटेर का 100 अण्डे से कृत्रिम हैचरी मशीन पद्धति से चूजे का उत्पादन किया जा रहा है। महिलाएं चूजें उत्पादन करके अन्य गोठानों को भी भेज रही है। ताकि अन्य समूह की महिलाएं भी बटेर पालन से आर्थिक लाभ प्राप्त कर सके। अंबिका स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ और जिला प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा है कि बटेर से लगभग 40 चूजें निकाल चुकी है और गोठानों में भेज रही है। उन्होंने बताया कि अण्डे से चुजें निकलने के बाद लगभग 5 से 10 दिन तक उनकों रखा जाता हैं। फिर गोठानो में मांग के अनुसार भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 6 हजार से 8 हजार तक की आमदनी समूह को हो चुकी है।

 





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